Business study part . New business karne ke liye knowlage . 11 class

इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आपः
• एेतिहासिक अतीत में व्यापार और वाणिज्य के विकास की सहराहना कर सकेंगे;
• व्यापार और वाणिज्य में स्वदेशी बैंकिंग प्रणाली का योगदान समझ सकेंगे;
• व्यवसाय की अवधारणा और उद्देश्यों को समझा सकेंगे;
• उद्योगों के प्रकारों की चर्चा करेंगे;
• वाणिज्य से संबंधित गतिविधियाँ समझाएँगे;
• व्यवसायिक जोखिमों की प्रकृति और उनके कारणों का वर्णन करेंगे; तथा
• व्यवसाय प्रारंभ करते समय विचारणीय बुनियादी घटकों की चर्चा करेंगें।

इमरान, मनप्रीत, जोसेफ और प्रियंका कक्षा दस में सहपाठी रहे हैं। परीक्षा समाप्त होने पर, वे अपनी मित्र रुचिका के घर पर मिले! वे अपने परीक्षा दिनों के अनुभवों पर चर्चा ही कर रहे थे, कि रुचिका के पिता रघुराज चौधरी ने बीच में आकर उनके हाल-चाल पूछे। उन्होंने उनके करियर की योजनाओं के बारे में भी पूछा लेकिन किसी के पासकोई निश्चित जवाब नहीं था। रघुराज (जो स्वयं एक सफल व्यवसायी हैं), ने व्यवसाय को करियर का एक अवसर बताया। जोसेफ इस विचार से उत्तेजित हो गया और बोला, ‘हाँ, बहुत सारा पैसा कमाने के लिए व्यवसाय वास्तव में बहुत अच्छा है।’ रघुराज ने उन्हें बताया कि व्यवसाय से केवल पैसा ही
नहीं, बल्कि और भी बहुत कुछ है। उन्होंने कहा, व्यावसायिक गतिविधियाँ किसी भी देश में संवृद्धि और विकास को आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने उन्हें आगे बताया कि व्यावसायिक गतिविधियों की जड़ों को प्राचीन काल में भी देखा जा सकता है कि कैसे व्यापार भारतीय उप-महाद्वीप की समृद्धि में मदद करता है। प्रियंका बोली कि उन्होंने अपनी इतिहास की पाठ्यपुस्तक में ‘रेशमी मार्ग’ के बारे में पढ़ा हैं। रघुराज फिर अपनी दैनिक गतिविधियों मेें व्यस्त हो जाते हैं। मगर, इन चार सहपाठियों ने सवाल उठाने प्रारम्भ कर दिये। चारों सहपाठियों का वार्तालाप इसी बात पर फोकस था कि प्राचीनकाल में व्यापारिक गतिविधियाँ कैसे होती थी। व्यापारिक गतिविधियों की जड़ें
कितनी दूर तक देखी जा सकती हैं? भारतीय उप-महाद्वीप को उस समय के यात्रियों ने ‘स्वर्ण भारत और स्वर्णद्वीप’ क्यों कहा? किस कारण से कोलम्बस और वास्को-डी-गामा भारत की खोज के लिए निकले? उन्होंने व्यवसाय की प्रकृति, लक्ष्य, विकास और इस प्रकार के अनेक प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए अपने विद्यालय के वाणिज्य शिक्षक से मिलने का निश्चय किया।

 1.1 विषय-प्रवेश




सभी मनुष्यों को, चाहे वे कहीं भी हों, अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की इस आवश्यकता ने लोगों को दूसरों की ज़रूरत के अनुसार उत्पादन और विक्रय की गतिविधियों हेतु प्रेरित किया। सभी आधुनिक चिंतनशील सभ्यताओं में, व्यवसाय एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है, क्योंकि यह लोगों द्वारा आपेक्षित वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और विक्रय से जुड़ी है। अधिकतम व्यावसायिक गतिविधियों का लक्ष्य लोगों की वस्तुओं और सेवाओं की मांग को पूरा करके धन अर्जित करना होता है। व्यवसाय हमारे जीवन का केंद्र है। यद्यपि, आधुनिक समाज में हमारा जीवन अनेक अन्य संस्थाओं, जैसे-स्कूल, कॉलेज, चिकित्सालय, राजनैतिक पार्टियों, और धार्मिक निकायों से प्रभावित होता है। व्यवसाय का हमारे दैनिक जीवन पर बड़ा प्रभाव है इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम व्यवसाय की आवधारणा, प्रकृति और उद्देश्यों को समझें।
अध्याय दो खण्डों में विभाजित है। प्रथम खण्ड प्राचीन काल में व्यापार और वाणिज्य के इतिहास को बताता है तथा द्वितीय खण्ड व्यवसाय की आवधारण, प्रकृति और उद्देश्यों की विवेचना करता है।

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