श्री हनुमान चालीसा @ abhimanyusinghnarukanewreminder6272.blogspot.com .shree hanuman chalisa in hindi language.
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउ रघुबर बिमल जसु,
जो दायकु फल चारि।
बुद्धिहीन तनु जानिके,सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहू कलेश बिकार।
चौपाई ,
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपिस तिहु लोक उजागर।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।
महावीर विक्रम बजरंगी ।
कुमति निबार सुमति के संगी।
कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुंचित केसा।
हाथ बज्र औ धुवजा बिराजै।
कांधे मुज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सवारे।।
लाय संजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुवीर हरसि उर लाये।।
रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।
सहस बदन तुमरो जस गावै।
अस कही श्रीपति कंठ लगावै।
सनकादिक बह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जब कुबेर दिगपाल जहा ते।
कबि कोबिद कही सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मन्त्र बिभीषण माना।
लंकेस्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु।
लील्यो ताही मधुर फल जानु।
प्रभु मुद्रिका मेली मुख माही ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाही।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुवारे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहे तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनो लोक हाँक ते कांपे।
भूत पिसाच निकट नही आवे।
महावीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।
संकट ते हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावे।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
औऱ मनोरथ जो कोई लावे।
सोइ अमित जीवन फल पावै।
चारो जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ठ सिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुःख बिसरावै।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जनम हरि भक्त कहाई।
औऱ देवता चित न धरई।
हनुमत सेई सर्ब सुख करई।
संकट कटे मिटे सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गुसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाहिं।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छुटहि बंदी महा सुख होई।।
जो यह पड़े हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजे नाथ ह्रदय मँह डेरा।।
दोहा
पवन तनय संकट हरण,
मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित,
ह्रदय बसहु सुर भूप।।
जय श्रीराम ,जय श्रीराम,जय श्रीराम


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